Tuesday, 4 March 2014

मुझको भी हक़ है रोशनी  का.. 
सूरज, चाँद सितारों से सजे आसमानों का 
उस आसमान में फिर बेबाक उड़ानों का 
खुली फ़िज़ाओं कि खुशबु का. 
बेचैन, सिसकती अंधियारी गलियों में 
कतरा मेरे हिस्से कि ख़ुशी का 
तपती रेत भरी राहों में 
 अपने सपनों को थोड़ी नमी से सजाने का 
तेरे झूठे आडम्बरों के आगोश से 
अपना खोया वजूद ढूंढ लाने का 
अगर हम सच में बदलाव चाहतें हैं तो हमें अपनी ही माँ को, अर्धांगिनी को दोयम दर्जे का इंसान समझने से बचना होगा। ....  

Friday, 17 May 2013

jindagi

न सोचो उस बेबसी के बारे  में 
जिसने तुम्हे आगे बढ़ने न दिया 
सोचो उस बेकली के बारे में  
जिसने कुछ कर जाने की चाहत को जनम दिया 

न सोचो उस पत्थर के बारे में 
जिसने तुम्हे डराया चोट पहुचाया 
सोचो उस रास्ते के बारे में 
जिसने तुम्हे मंजिल से मिलवाया 

न सोचो कि जिंदगी ने तुमसे क्या-क्या छीन लिया 
सोचो इसे पाकर तुमने क्या-क्या न पा लिया 
बेबसी लाचारी मुश्किलें सब अपने ही अन्दर है 
और इन्हें बहा ले जाये आत्मविश्वास वह समुन्दर है 

न सोचो की तुम क्या कर न पाए 
आखिरी सांस तक संभावनाएं जो बाकि है 
तो चलो मिलो अपने आप से 
आखिर खुशियों की मीठी मिसरी अपने ही मन के अंदर है 

Friday, 12 October 2012

kisi waqt pe har waqt uss waqt ka pehra jis waqt mein hum uss waqt ko kamyab banane ki than lete haiii......